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भाजपा लगातार सातवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने के दावे के साथ मैदान में

Aug 31, 2026 22 बार देखा mahaveer vyas
भाजपा लगातार सातवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने के दावे के साथ मैदान में
भाजपा के किले पर कांग्रेस की नजर, बीएपी की दस्तक ने बढ़ाई धड़कनें


उदयपुर। झीलों की नगरी में नगर निगम चुनाव की सियासी जंग अब पूरी तरह सामने आ चुकी है। 80 वार्डों में प्रत्याशियों के नामांकन के साथ ही भाजपा और कांग्रेस के बीच बोर्ड बनाने की सीधी लड़ाई तेज हो गई है। एक ओर भाजपा लगातार सातवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने के दावे के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर कांग्रेस लंबे समय से चले आ रहे भाजपा के विजय रथ को रोककर सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। इसी बीच भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी ने भी नगर निगम चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए 9 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी उतार दिए हैं। इससे कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बन गई है और चुनावी गणित भी बदल सकता है।

उदयपुर में अब तक लगातार छह बोर्ड भाजपा के बने हैं। 1994 से नगर राजनीति में भाजपा का दबदबा कायम है और अब पार्टी की नजर सातवीं जीत पर है। 2019 के चुनाव में भाजपा ने 70 में से 44 वार्डों में जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 20 और अन्य प्रत्याशियों को 6 सीटें मिली थीं। इस बार वार्डों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। भाजपा ने अनुभवी चेहरों के साथ कई नए प्रत्याशियों पर भी भरोसा जताया है। हालांकि टिकट वितरण के बाद सामने आई नाराजगी और संभावित बगावत को संभालना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

कांग्रेस के लिए यह चुनाव लंबे समय से चले आ रहे भाजपा के वर्चस्व को तोड़ने का बड़ा मौका है। पार्टी स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और वार्ड स्तर की समस्याओं को आधार बनाकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही है। कांग्रेस ने 45 वार्ड जीतकर बोर्ड बनाने का दावा किया है, लेकिन टिकट वितरण के बाद उपजा असंतोष उसकी राह मुश्किल कर सकता है। कई नेताओं के टिकट कटने के बाद नाराजगी सामने आई है। अब कांग्रेस के सामने बागियों को साधने के साथ संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है।

इधर भारत आदिवासी पार्टी ने भी उदयपुर नगर निगम चुनाव में अपनी ताकत आजमाने का फैसला किया है। पार्टी के उदयपुर जिलाध्यक्ष अमित खराड़ी ने 9 अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी की है। सूची के अनुसार वार्ड 79 से रामलाल गमेती, वार्ड 41 से चमन लाल, वार्ड 42 से हेमलता गमेती, वार्ड 43 से शांति लाल गमेती, वार्ड 13 से संतोष कटारा, वार्ड 8 से नाजमीन, वार्ड 10 से शाकिब खान, वार्ड 12 से मुजफ्फर हुसैन और वार्ड 70 से अरशद अयूब को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। बीएपी की एंट्री खासकर उन वार्डों में चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकती है, जहां उसके प्रत्याशी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं।

अब भाजपा के सामने सातवीं बार बोर्ड बनाकर अपना दबदबा कायम रखने की चुनौती है, कांग्रेस भाजपा के विजय रथ को रोककर सत्ता में वापसी की कोशिश में है और बीएपी ने 9 प्रत्याशियों के साथ मुकाबले को नया कोण दे दिया है। ऐसे में उदयपुर नगर निगम चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच आमने-सामने की लड़ाई नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में बागियों की भूमिका, स्थानीय समीकरण और बीएपी की मौजूदगी कई वार्डों में जीत-हार का गणित बदल सकती है। यही वजह है कि इस बार उदयपुर के 80 वार्डों का चुनाव परिणाम मेवाड़ की राजनीति के लिए भी खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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