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भारत का दो टूक संदेश, कंचन गुप्ता बोले- 'न अभी और न भविष्य में 'वर्ल्ड बैंक ने तोड़ी सिंधु जल संधि,

Sep 01, 2026 10 बार देखा desk

सिंधु जल संधि पर कथित मध्यस्थता कोर्ट (CoA) के फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया दुनिया के लिए भी बहुत बड़ा संकेत है। भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को ना सिर्फ सिरे से खारिज कर दिया है, बल्कि स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि इसकी एकतरफा हरकतें, न तो अभी और कभी भविष्य में सिंधु जल पर भारत की संप्रभुता को जरा भी डिगा सकती है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सीनियर एडवाइजर कंचन गुप्ता ने जो कुछ कहा है, वह सुनकर पाकिस्तान और भी तिलमिला सकता है।


सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सीनियर एडवाइजर कंचन गुप्ता ने मंगलवार सुबह-सुबह सिंधु जल संधि पर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में कहा है, 'भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर गैर-कानूनी तरीके से गठित तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के अंतरिम उपायों और स्थिति से जुड़े फैसले को ठुकरा दिया है।'

वर्ल्ड बैंक ने तोड़ी सिंधु जल संधि- कंचन गुप्ता

उन्होंने सीधे विश्व बैंक को ही घेरते हुए कहा, 'इस तथाकथित न्यायालय का गठन वर्ल्ड बैंक ने संधि की शर्तों का सरेआम उल्लंघन करके किया था और भारत ने इसके कथित फैसले को सिरे से ठुकरा दिया है, ठीक उसी तरह से जैसे अवैध तरीके से बनाई गई इस संस्था की पिछली सभी घोषणाओं को खारिज करता आया है।'


'मध्यस्थता न्यायालय को कभी भी कानूनी मान्यता नहीं'

  • उनका कहना है कि 'भारत ने कभी भी अवैध तरीके से गठित इस कथित मध्यस्थता न्यायालय को कानूनी मान्यता नहीं दी है।'
  • भारत ने हमेशा यही कहा है कि 'इस कथित मध्यस्थता संस्था का गठन ही सिंधु जल समझौते का घोर उल्लंघन है।
  • 'यही वजह है कि भारत इस संस्था के सामने कभी नहीं गया और इसके पिछले फैसलों पर कभी भी ध्यान नहीं दिया।'

इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय को भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला लेने का कोई भी अधिकार नहीं है। इसकी घोषणाओं का न अभी और न कभी भविष्य में भारत की ओर से चलने वाली परियोजनाओं पर कोई असर पड़ेगा।
कंचन गुप्ता, सीनियर एडवाइजर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

सिंधु जल समझौते पर मध्यस्थता कोर्ट ने क्या कहा

  • दरअसल नीदरलैंड के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत ने आदेश दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है।
  • मध्यस्थता अदालत ने भारत से कहा कि यह 'समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।'
  • सोमवार को भारत ने सिंधु जल समझौते पर मध्यस्थता न्यायालय की घोषणा को सिरे से खारिज कर दिया और इस कोर्ट को ही गैर-कानूनी बताते हुए कहा कि इस मामले में दखल देने का उसके पास कोई अधिकार ही नहीं है।

सिंधु जल समझौता कब हुआ था

  • भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था।
  • भारत का हमेशा से मानना रहा है कि सिंधु जल संधि एकतरफा पाकिस्तान के हक में हुई और उसका अधिकतर लाभ उसे ही दिया जा रहा है और फिर भी वह उसका पूरी तरह से फायदा उठा नहीं पा रहा।
  • पाकिस्तान ने हमेशा इस संधि का फायदा उठाते हुए खूब मनमानी की और भारत के सिंधु जलों पर समझौते के तहत मिले उचित अधिकारों के इस्तेमाल में भी अड़ंगा डालने की आदत बना ली।
  • भारत ने सबकुछ सहते हुए 65 साल तक इस एकतरफा समझौते का पालन किया और सारे नुकसान को ताक पर रखकर संधि का सम्मान किया।

सिंधु जल समझौता को भारत ने कब रोका

  • 22 अप्रैल, 2025 को जब पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में 25 पर्यटकों को धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला और एक स्थानीय की भी जान ले ली, तब भारत ने सिंधु जल संधि पर मजबूरन बड़ा कदम उठाया।
  • 23 अप्रैल को भारत ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को अस्थायी तौर पर रोक दिया।
  • तब से भारत का इसपर स्पष्ट नीति है कि पहले पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद पर लगाम लगाए और फिर इस समझौते पर आगे की बात करे।
  • लेकिन, पाकिस्तान मुद्दे की बात करने के बजाय दुनिया भर में संधि रोकने की शिकायत करके रोता-धोता आ रहा है।
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