मेवाड़ के चारभुजा नाथ मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में भगवान को श्रीफल, राखी व दक्षिणा भेंट कर मनाया रक्षाबंधन पर्व
मेवाड़ के चारभुजा नाथ मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में भगवान को श्रीफल, राखी व दक्षिणा भेंट कर मनाया रक्षाबंधन पर्व
चारभुजा | कस्बे के कृष्णधाम मंदिर में शुक्रवार को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर परंपरा अनुसार पूजा हुई। शुभ मुहूर्त में देवस्थान कचेड़ी से पुजारी मृदंग थाली एवं नर्सिगे के साथ थाल में चांदी की राखी, श्रीफल और दक्षिणा लेकर मंदिर पहुंचे। भगवान को चांदी की राखी, श्रीफल, पत्रम और पुष्पम यथा अनुसार अर्पित किए। उससे पूर्व भगवान के राजभोग आरती की गई। उसके बाद में भगवान को चांदी की राखी भेंट करने के बाद पुजारियों और कस्बेवासियों ने एक-एक कर भगवान को राखी और श्रीफल चढ़ाए। इसके बाद पुजारियों को राखी बांधी गई। उसके बाद राखी का त्यौहार पूरे कस्बे में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जहां बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा बड़ो से आशीर्वाद लिया वही भाइयों ने बहनों को तोहफे के रूप में कपड़े और दक्षिणा देकर बहनों के रक्षा की जिम्मेदारी ली । वही चारभुजा नाथ मंदिर में रक्षाबंधन होने के बाद आसपास के गांवों में भी बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और बड़ों से आशीर्वाद लिया। चारभुजा मंदिर में राखी की परंपरा निभाने के लिए काफी संख्या में पुजारीगणों के साथ कस्बे वासी एवं देवस्थान विभाग के कार्मिक शामिल हुए।
रक्षाबंधन के त्यौहार पर आने जाने वाले लोगों की निजी एवं रोडवेज बसों में दिनभर भारी भीड़ के साथ कस्बे में आने जाने वाली सभी बसें यात्रियों से भरी नजर आई
चारभुजा | कस्बे के कृष्णधाम मंदिर में शुक्रवार को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर परंपरा अनुसार पूजा हुई। शुभ मुहूर्त में देवस्थान कचेड़ी से पुजारी मृदंग थाली एवं नर्सिगे के साथ थाल में चांदी की राखी, श्रीफल और दक्षिणा लेकर मंदिर पहुंचे। भगवान को चांदी की राखी, श्रीफल, पत्रम और पुष्पम यथा अनुसार अर्पित किए। उससे पूर्व भगवान के राजभोग आरती की गई। उसके बाद में भगवान को चांदी की राखी भेंट करने के बाद पुजारियों और कस्बेवासियों ने एक-एक कर भगवान को राखी और श्रीफल चढ़ाए। इसके बाद पुजारियों को राखी बांधी गई। उसके बाद राखी का त्यौहार पूरे कस्बे में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जहां बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा बड़ो से आशीर्वाद लिया वही भाइयों ने बहनों को तोहफे के रूप में कपड़े और दक्षिणा देकर बहनों के रक्षा की जिम्मेदारी ली । वही चारभुजा नाथ मंदिर में रक्षाबंधन होने के बाद आसपास के गांवों में भी बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और बड़ों से आशीर्वाद लिया। चारभुजा मंदिर में राखी की परंपरा निभाने के लिए काफी संख्या में पुजारीगणों के साथ कस्बे वासी एवं देवस्थान विभाग के कार्मिक शामिल हुए।
रक्षाबंधन के त्यौहार पर आने जाने वाले लोगों की निजी एवं रोडवेज बसों में दिनभर भारी भीड़ के साथ कस्बे में आने जाने वाली सभी बसें यात्रियों से भरी नजर आई