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आत्म निरीक्षणकर मैत्री की धारा बहाने का सर्वोत्तम पर्व है संवत्सरी महापर्व क्षमापना साध्वी राकेश कुमारी

महाराष्ट्र , मुंबई Sep 16, 2026 95 बार देखा विकास धाकड़
आत्म निरीक्षणकर मैत्री की धारा बहाने का सर्वोत्तम पर्व है  संवत्सरी महापर्व  क्षमापना साध्वी  राकेश कुमारी


विकास धाकड़

मुंबई: उप शहर  विले पार्ले आचार्य  महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी  राकेश कुमारी , साध्वी  मलय विभा , साध्वी  विपुल यशा  एवं साध्वी  चेतस्वी प्रभा  के सान्निध्य में सिम्फनी के दोनों हॉल में उत्साह,उमंग एवं उल्लासमय वातावरण के साथ भगवती संवत्सरी एवं क्षमापना दिवस आध्यात्मिक भावों से मनाया गया। विशाल जनमेदनी को संबोधित करते हुए । भगवती संवत्सरी महापर्व पर साध्वी  राकेश कुमारी  ने कहा कि भगवती संवत्सरी महापर्व समस्त मानव जाति का महान पर्व एवं मानव संस्कृति का आदि दिन है। जैन धर्मावलंबी भगवती संवत्सरी महापर्व को सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। यह आध्यात्मिक पर्व समस्त प्राणी जगत के प्रति मैत्री, करुणा एवं अहिंसा का संदेश लेकर मानव द्वार पर दस्तक देता है। साध्वी श्री  ने संवत्सरी महापर्व के महत्व को उजागर करते हुए भगवान ऋषभ के कालखंड से लेकर जैन धर्म के ऐतिहासिक एवं प्राग़इतिहास तथा भगवान महावीर के  भीषण उपसर्ग से केवलज्ञान प्राप्ति तक की जानकारी दी। उन्होंने जैन धर्म के प्रभावशाली एवं चमत्कारी आचार्यों, तेरापंथ धर्मसंघ की शालीन, सुदृढ़ एवं स्वस्थ प्रभावशाली आचार्य परंपरा,साध्वी प्रमुखाओं के इतिहास तथा जैन धर्म के श्रावक-श्राविकाओं के योगदान पर विस्तार से विवेचन करते हुए ओजस्वी वाणी में प्रकाश डाला। साध्वी श्री मलय विभा  ने अहिंसा के पुजारी भगवान महावीर के जीवन-दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का दिवस हमें प्रेरणा देता है। कि हम अपने जीवन का लेखा-जोखा कर आत्मावलोकन करें और क्षमा याचना करें। क्षमा दिवस पर उन्होंने कहा कि व्यवहार के धरातल पर खड़े होकर भीतर की गांठें खोलकर क्षमा याचना करने पर ही कर्मों की ग्रंथि का विमोचन होता है।

साध्वी श्री विपुल यशा  ने उत्तराध्ययन के नौवें अध्ययन नमी राजर्षि पर प्रकाश डाला। साध्वी श्री चेतस्वी प्रभा जी ने गणधरवाद के विषय में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का मंच संचालन साध्वी श्री मलय विभा  ने किया। सीमा बाफना द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। क्षमापना दिवस-वैर-विरोध की गांठें खोलने का पावन अवसर क्षमापना दिवस पर साध्वी श्री राकेश कुमारी  ने कहा—“क्षमा वीरस्य भूषणम्।” क्षमा वीरों का महान आभूषण है। सबसे खमत- खामणा करते हुए। जिनके साथ वैर-विरोध है!उनसे हृदय के अंतःकरण से क्षमा याचना करने पर जीवन निर्मल एवं पवित्र बनता है। आपसी परस्पर जीवन को निश्छल बनाकर वैमनस्य, विषमता, कलुषता एवं कालिमा को धोने का पावन-पवित्र और सर्वोत्तम पर्व है आज का दिन। क्षमापना दिवस के अवसर पर सिमा  रोटांगण द्वारा मधुर गीतिका प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की ट्रस्टी शांता  पुगलिया,मुंबई सभा के उपाध्यक्ष विष्णु बाफना,सांताक्रूज़ ते.यु.प के मंत्री दिलीप  बाफना,पवई तेरापंथ सभा के मंत्री शांतिलाल  कोठारी,बांद्रा से मुकेश  नौलखा, खार से भरत  कच्छारा, अंधेरी सभा से विजय  परख, विलेपार्ले ते.यु.प के अध्यक्ष महेंद्र जी वडाला, महिला मंडल अध्यक्षा कुसुम  कोठारी एवं अनिल  बाफना ने क्षमापना दिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। क्षमापना दिवस का कुशल संचालन दीपक 

 डागलिया द्वारा किया गया। तपस्या एवं पोषध साधना पूरे चौखले अंधेरी, विलेपार्ले,सांताक्रूज़,खार एवं बांद्रा क्षेत्र से साधकों ने उत्साहपूर्वक तपस्या में भाग लिया। इस दौरान 27 अट्ठाई की तपस्याएँ, 200 से अधिक तेले, 2 ग्यारह की तपस्या हुई तथा भगवती संवत्सरी के अवसर पर कुल 300 पोषध हुए। भगवती संवत्सरी एवं क्षमापना पारणा के प्रायोजक  मदनलाल , शांतिलाल ,भरत  दुग्गड़ एवं गिन्नी देवी,मधु  दुग्गड़ आदि का विलेपार्ले समाज की ओर से स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से अंजाम देने में विलेपार्ले ते.यु.प अध्यक्ष महेंद्र  वडाला, मंत्री रॉकी कोठारी, अनिल  बाफना, दीपक  डागलिया, मुकेश  कोठारी, मुकेश  वडाला, सुनील  वडाला, चेतन  सिंघवी, कल्पेश वडाला, मनोहर  कोठारी आदि श्रावकों ने जागरूकता एवं सक्रिय सहयोग निभाया। विलेपार्ले तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा कुसुम कोठारी, मंत्री वनिता वडाला, अंकिता वडाला, सुनीता गेलड़ा, बेबी कोठारी, हेमा  कोठारी, सुमित्रा वडाला, अनुसूया वडाला, अनिता सिंघवी, रेखा कोठारी आदि महिला मंडल सदस्यों का  आयोजन में सहयोग रहा।

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