आत्मा सें परमात्मा तक का सफर हैं,जप - साध्वी राकेशकुमारी

आत्मा सें परमात्मा तक का सफर हैं,जप - साध्वी राकेशकुमारीविकास धाकड़
मुंबई:विलेपार्ले में पर्युषण महापर्व के छठे दिवस ‘जप दिवस’ कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी श्री जी के नवकार मंत्रोच्चार से हुई। अंधेरी,विलेपार्ले,सांताक्रूज़ एवं बांद्रा की बहनों द्वारा पंच परमेष्ठी के गीतों पर अत्यंत रोचक एवं भावपूर्ण मंगलाचरण की प्रस्तुति दी गई। मंगलाचरण की गीतिका को रेणु कोठारी ने अपने स्वरों से सुसज्जित किया। आचार्य महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी राकेश कुमारी ने छठे दिवस ‘जप दिवस’ पर सिम्फनी हॉल में जनता को संबोधित करते हुए कहा, “जीवन में बदलाव लाने की श्रेष्ठतम प्रक्रिया है !जप, जीवन का कायाकल्प करने का सर्वोत्तम उपक्रम है जप। साध्वी श्री ने कहा कि सभी धर्मों में मंत्र साधना एवं आराधना करने का प्रावधान है। जप दो प्रकार से किया जाता है—एक लौकिक सिद्धि के लिए तथा दूसरा अलौकिक सिद्धि के लिए। आत्मा से परमात्मा तक का सफर करने वाला जप लोकोत्तर जप होता है। जप से आत्मा एवं आभामंडल निर्मल व पवित्र बनता है। जप पापों को काटने के लिए कुल्हाड़ी का काम करता है। साध्वी श्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि एकाग्रता एवं लयबद्धता से जप करने पर आधी, व्याधि और उपाधि—तीनों प्रकार की बीमारियों का नाश होता है। इस अवसर पर साध्वी श्री मलयविभा ने आज के विषय को प्रतिबोधित करते हुए कहा कि मणि-औषध से भी अनंत गुणाधिक मंत्र की अद्भुत एवं अचिंत्य शक्ति होती है। मंत्र की साधना तीन कारणों से की जाती है!पहला देव आराधना, दूसरा बाधा निवारण और तीसरा आत्म आराधना। विधिवत जप अनुष्ठान करके व्यक्ति अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकता है। आज का विज्ञान भी मानता है! कि ध्वनि प्रकंपन अत्यंत प्रभावशाली होते हैं। पराध्वनि का प्रयोग होता है तो असंभव कार्य भी ध्वनि तरंगों से आसान किया जा सकता है। प्रवचन से पूर्व साध्वी श्री विपुल यशा ने उत्तराध्ययन के चौंतीसवें अध्ययन ‘लेश्या’ पर विस्तार से व्याख्या की। साथ ही रात्रिकालीन सत्र में आगम संबंधी रोचक घटनाओं का उल्लेख करते हैं। कार्यक्रम के दौरान सिम्फनी हॉल के ओनर सुनील वेंगुरलेकर का विलेपार्ले तेयुप द्वारा सम्मान किया गया। वहीं कल्याण मित्र स्वर्गीय कैलाश गोयल के सुपुत्र अभिषेक गोयल ने भी अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। विलेपार्ले निवासी भरत बोराणा,जो विलेपार्ले में प्रवासित सभी साधु-साध्वियों को निःशुल्क दवाइयों की सेवा प्रदान कर रहे हैं! उनका भी विलेपार्ले तेयुप द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम का समापन साध्वी श्री मलयविभा
के रोचक प्रश्न-उत्तर क्रम के साथ हुआ।