देव पितृ पिठोरी अमावस्या पर फूलों से महका ठाकुर जी का दरबार
देव पितृ पिठोरी अमावस्या पर फूलों से महका ठाकुर जी का दरबार



के बीच गुलाब की पुष्पवर्षा से सराबोर हुआ परिसर
मनीष दवे
राजसमंद:चारभुजा मेवाड़ के धणी और कृष्ण धाम के नाम से प्रसिद्ध चारभुजा गढ़बोर में सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं आज भी कायम हैं। देव पितृ एवं पिठोरी अमावस्या के अवसर पर शुक्रवार को चारभुजा नाथ मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। भगवान चारभुजा नाथ का स्नान-ध्यान के बाद विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें आकर्षक पोशाक, अस्त्र-शस्त्र आयुध, गले में वैजयंती माला और मेवाड़ी पाग धारण कराई गई। श्रद्धालुओं को विशेष श्रृंगार दर्शन करवाए गए।
इससे पूर्व चतुर्दशी की रात भगवान के बाल स्वरूप का बेवान निकाला गया। मंदिर से मीराबाई मंदिर तक निकले बेवान के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा गुलाब के फूलों की पुष्पवर्षा की गई जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रामदेवरा से लौट रहे जातरुओं की भीड़
के चलते चारभुजा धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बनी हुई है। मध्यप्रदेश, मालवा सहित विभिन्न प्रांतों से रामदेवरा के दर्शन कर लौट रहे जातरू चारभुजा नाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी मंदिर परिसर दिनभर खचाखच भरा रहा।श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था संभाली। सीमित पुलिस बल के बावजूद जवानों ने मुख्य द्वार से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से प्रवेश व निकासी करवाई, ताकि मंदिर परिसर में भीड़ और भगदड़ की स्थिति नहीं बने।
माहेश्वरी समाज ने नाचते-गाते कराया मनोरथ
देव पितृ अमावस्या के अवसर पर माहेश्वरी समाज की अमावस्या संघ की ओर से भगवान की बाड़ी से भोग मनोरथ तैयार किया गया। समाज जन नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए मनोरथ लेकर मंदिर पहुंचे। यहां भगवान को ध्वजा चढ़ाई गई !तथा राजभोग आरती में शामिल होकर मनोरथ कराया गया।