तेरापंथ महिला मंडल गोरेगांव का सामूहिक आयंबिल अनुष्ठान संपन्न


तेरापंथ महिला मंडल गोरेगांव का सामूहिक आयंबिल अनुष्ठान संपन्न
विकास धाकड़
मुंबई: गोरेगांव सामूहिक आयम्बिल अनुष्ठान का सुंदर आयोजन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में तेरापंथ महिला मंडल क्षेत्र गोरेगांव किया गया !
यह आयोजन त्याग,तपस्या, संयम और आत्मानुशासन की सुंदर अभिव्यक्ति रहा। इस अवसर पर तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद, महिला मंडल, अणुव्रत समिति, कन्या मंडल एवं ज्ञानशाला के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। 33 साधकों ने आयम्बिल तप में सहभागिता की। इस सामूहिक आयम्बिल में गोरेगांव से 33 आयम्बिल हुए! जिसमें 8 भाइयों एवं 25 बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी रसनेन्द्रिय पर संयम रखते हुए इस आध्यात्मिक अनुष्ठान को पूर्ण किया। आयम्बिल करने वाले साधक सभा से वरिष्ठ श्रावक अर्जुनलाल सांखला,चतरलाल सिंघवी, मनोहरजी चपलोत, अशोक सिंघवी एवं उपासक रमेश सिंघवी। युवक परिषद से अध्यक्ष मनीष सिंघवी, नवीन आच्छा एवं हर्ष सिंघवी महिला मंडल से मंत्री कल्पना चोरड़िया, संगठन मंत्री पिंकी सांखला, उपासक मंजू सिंघवी, कमला सुराणा, सरोज चंडालिया, रेखा सिंघवी, पुष्पा सिंघवी,उपासक भावना सांखला, नीलम कोठारी, हेमलताजी रांका, कमलादेवी राठौड़, किरणजी बांठिया, प्रेक्षा राठौड़, पूर्णिमा चौधरी, मधु चंडालिया, मीना कोठारी, पिस्ता मादरेचा, रेखा सांखला ईस्ट, मोना दक, वनिता ओस्तवाल, पूनम तलेसरा, प्रेरणा बोहरा, रवीना सिंघवी एवं सारिका आच्छा। कन्या मंडल से:
भूमि बाफना एवं ईशिका चिप्पड़, उपस्थिति थी! इस अवसर पर सभा अध्यक्ष सुभाष सिंघवी,मंत्री विनोद सिंघवी,मीडिया प्रभारी राकेश बोहरा तथा अणुव्रत समिति से शांतिलाल बाफना की विशेष उपस्थिति रही। सक्रिय कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। आयोजन को सफल बनाने में गोरेगांव महिला मंडल की अध्यक्षा डिम्पल हिरण, कोषाध्यक्ष कांता सिसोदिया, उपाध्यक्ष मीना गोखरू, उपाध्यक्ष पूनम बेद,सह मंत्री आशा धाकड़ तथा कार्यकारिणी सदस्य सरोज तलेसरा, शीलू चंडालिया, प्रतिमा सांखला एवं सपना सांखला का विशेष सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता रही । प्रायोजक परिवार इस सामूहिक आयम्बिल के प्रायोजक मोतीलाल हिरण परिवार रहे। सहयोग के लिए हृदय से आभार एवं साधुवाद।गोरेगांव महिला मंडल सामूहिक आयम्बिल करने वाले समस्त श्रावक-श्राविकाओं की महिला मंडल द्वारा अनुमोदना की गई। अपनी रसनेन्द्रिय पर विजय प्राप्त करना, स्वाद के आकर्षण से स्वयं को दूर रखना !और एक समय, एक स्थान एक प्रकार के आहार के साथ आयम्बिल जैसे तप को करना निश्चित रूप से आत्मशुद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।