पर्युषण पर्वाराधना का चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया


पर्युषण पर्वाराधना का चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया
वाणी में माधुर्य रखनेवाला सबका प्रिय बन जाता है- साध्वी विद्यावती
पायल दवे
मुंबई: मुंबई के उप शहर कांदिवली मे शासन श्री साध्वी विद्यावती 'द्वितीय' ने पर्युषण पर्व के चौथे दिन को वाणी संयम दिवस के रूप में मनाते हुए !प्रवचन में कहा- वाणी संयम मन की शांति का प्रभावक उपाय है। थके हुए राहगीर को वृक्ष की छाया विश्राम देती है! और मौन अशांत मन को विश्राम प्रदान करता है। मौन करने वाले के सारे काम सिद्ध हो जाते हैं। वाणी संयम अर्थात् कम बोलें। अनावश्यक न बोलें। मर्मभेदी या व्यंग्यात्मक भाषा न बोलें। भाषा एक जादू का काम करती है। प्रिय और मधुर बोलेंगे तो शत्रु भी मित्र बन जायेगा। अगर कटुक वचन बोलें है! तो मित्र भी शत्रु बन जायेगा। साध्वीश्री ने आगे भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर पाथेय प्रदान करते हुए कहा- नयसार की आत्मा का सोलहवां भव चल रहा है। कर्मों का बंधन प्राणी हंसते हंसते कर लेता है! पर उनको भोगना बड़ा कठिन हो जाता है। इसलिए कर्मों के बंधन से हमेशा डरते रहिए।
साध्वी प्रियंवदा ने उद्बोधन में कहा- कर्मों को बांधते वक्त थोड़ा शुभ भविष्य का भी चिंतन करें। कर्मनिर्जरा के लिए अनोदरी स्वाध्याय सामायिक, पौषध, जप व त्याग उत्तम साधन है। कर्म निकाचित भी होते हैं! और दलिक भी होते हैं। पर्युषण काल में जो प्रत्येक दिवस निर्धारित है! उनकी सम्पक अनुपालना कर अपनी आत्मा को भावित करने का प्रयास करें। साध्वी प्रेरणा श्रीजी एवं साध्वी मृदुयशाजी ने वाणी संयम पर ऐसा सुंदर गीत प्रस्तुत किया ! कि उपस्थित जनमेदिनी ने ॐ अर्हम् की ध्वनि से जोरदार हर्ष प्रकट किया। साध्वी ऋद्धियशाजी ने आज के दिन अधिकाधिक मौन साधना करने की प्रेरणा दी। समणी शुभप्रज्ञा ने वक्तव्य में कहा- वाणी संयम भीतर तक पहुंचने का द्वार है। ऐसे कई ऋषि मुनि साधु साध्वियां हुए हैं! जिन्होंने दीर्घ समय तक मौन साधना की है। जितना संयम रखेंगे उतनी अपने भीतर ऊर्जा संचित होगी। मौन से विचारों का अल्पीकरण होता है। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद मुंबई टीम के उपस्थित : पदाधिकारियों में से अंकुर लुणीया ने अपने विचार व्यक्त किये! 'विनोद बोहरा ने संस्कार निर्माण शिविर की विस्तृत जानकारी दी | मंगलाचरण जोगेश्वरी तेरापंथ महिला मंडल ने किया ' कार्यक्रम का संचालन जोगेश्वरी तेरापंथ युवक परिषद के मंत्री जयेश बाबेल ने किया।