देवेंद्र फडणवीस ने मराठी भाषा की अनिवार्यता पर एक साल के लिए रोक मंत्री प्रताप सरनाईक फैसला पलटा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठी भाषा की अनिवार्यता पर एक साल के लिए रोक लगाकर प्रताप सरनाईक के बहाने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी संदेश दिया है कि वह कितने भी हाथ पांव मार लें महाराष्ट्र की राजनीति के सुपर बॉस वही हैं। कुछ दिन पहले ही सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा था कि मुख्यमंत्री किसी भी मंत्री का फैसला पलट सकते हैं। इस अधिकार का पहला प्रयोग फडणवीस ने सरनाईक पर किया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मई में घोषणा किया कि ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा बोलना अनिवार्य होगा, नहीं तो उनके बैज रद्द कर दिए जाएंगे। इससे मुंबई में करीब पांच लाख चालकों की रोजी रोटी पर संकट मंडराने लगा था। लेकिन इस फैसले से बीजेपी का वोट बैंक प्रभावित होता इसलिए फडणवीस ने मौके की नजाकत को समझते हुए पूरे फैसले को ही एक तरह से पलट दिया। मुंबईएमएमआर में करीब पचास लाख उत्तर भारतीय रहते हैं जिन्हें बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है, इस निर्णय से वे बुरी तरह प्रभावित होते और इसका सीधा असर होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव पर पड़ता। फडणवीस ने मराठी भाषा पर निर्णय लेकर उत्तर भारतीयों का बीजेपी पर विश्वास और मजबूत कर दिया है। राजनीतिक मामलों के जानकार संदीप सोनवलकर कहते हैं कि फडणवीस ने इस फैसले से बीजेपी के वोट बैंक को सुरक्षित किया। साथ ही किसी भी मंत्री के फैसले को पलटने के अधिकार का पहला प्रयोग शिवसेना के मंत्री पर कर लिया। बीजेपी को इसका फायदा महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक मिलेगा।