सनवाड़ में डकैती व हत्या का खुलासा: चरवाहों के वेश में जंगलों-पहाड़ियों में खोज दबोचे 2 शातिर डकैत, 12 से अधिक वारदातें कबूलीं
महावीर व्यास
उदयपुर। जिले के फतहनगर थानांतर्गत सनवाड़ में हुई अंधाधुंध मारपीट, डकैती और वृद्ध की नृशंस हत्या की सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने अंतरप्रांतीय नेटवर्क से जुड़े दो बेहद शातिर और खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की टीम ने 21 दिनों तक जंगलों और पहाड़ियों में ग्रामीणों का वेश धारण कर इन आरोपियों को दबोचने में सफलता पाई है। पुलिस ने इस मामले में मदन नाथ कालबेलिया (30) निवासी आरणी, राशमी, चित्तौड़गढ़ तथा सुरेश चंद मोगिया (28) निवासी भाणुजा डांग, निकुम्भ, चित्तौड़गढ़ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि 4 अगस्त को प्रार्थी शिवलाल भील निवासी सनवाड़ ने फतहनगर थाने में मामला दर्ज कराया था कि 3 अगस्त की देर रात लगभग 12 बजे अज्ञात बदमाशों ने उनके घर पर धावा बोला। विरोध करने पर बदमाशों ने प्रार्थी, उसकी मां मांगी बाई, भाभी पुष्पा बाई और भाई ओंकार लाल के साथ बेरहमी से मारपीट की तथा घर में रखे सोने-चांदी के जेवरात व नकदी लूट लिए। हमले के दौरान प्रार्थी के पिता देवीलाल भील के सिर पर लकड़ी व डंडों से ताबड़तोड़ वार किए गए, जिससे अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
600 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, 4000 किमी तक किया पीछा
घटना की गंभीरता को देखते हुए फतहनगर थानाधिकारी मदन लाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एफएसएल, मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट और डॉग स्क्वायड को भी शामिल किया गया। चूंकि शातिर बदमाश वारदात के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करते थे, इसलिए पुलिस ने पारंपरिक खुफिया तंत्र पर भरोसा जताया। पुलिस टीम ने चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर और बेंगलुरु तक लगभग 4000 किलोमीटर के दायरे में दबिश दी और मार्ग में पड़े लगभग 600 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिला कि आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद इंसानी आबादी से दूर जंगलों और पहाड़ियों में छिपे हुए हैं। इस पर थानाधिकारी मदन लाल और पुलिस टीम ने चरवाहों और मवेशी चराने वालों का ग्रामीण वेश धारण किया और लगातार 21 दिनों तक दुर्गम जंगलों व पहाड़ियों में रहकर संदिग्धों के डेरों पर कड़ी निगरानी रखी। पकड़े गए दोनों आरोपी अभ्यस्त और खूंखार अपराधी हैं, जिनके खिलाफ पूर्व में हत्या, लूट, डकैती, नकबजनी और आर्म्स एक्ट के 10 से अधिक मामले दर्ज हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे सुनसान स्थानों, मंदिरों व एकांत मकानों की रेकी करते थे। वारदात के दिन वे चोरी की बाइक से 4-5 किमी दूर गाड़ी खड़ी कर पैदल पगडंडियों से पहुंचते थे, बिना मोबाइल फोन के वारदात को अंजाम देते और लूट व हत्या के बाद पुनः जंगलों में छिप जाते थे। पूछताछ में आरोपियों ने उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और भीलवाड़ा के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मंदिरों के ताले तोड़ने, दानपेटी की राशि साफ करने, राह चलती महिलाओं से सोने की रामनामी व मादलिया लूटने तथा वाहन चोरी की 12 से अधिक अन्य वारदातें करना स्वीकार किया है। पुलिस फिलहाल अन्य साथियों की धरपकड़ और लूटे गए जेवरातों की बरामदगी के लिए कड़ाई से अनुसंधान कर रही है, जिससे और भी कई बड़ी वारदातों के खुलासे की पूरी संभावना है।