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नई दिल्ली: जंतर-मंतर में जारी धरना-प्रदर्शन के बीच लगातार दो दिनों से मेट्रो सर्विस बाधित हो रही है। | अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 10% टैरिफ लागू किया है | विश्वराज सिंह मेवाड़ ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को पत्र लिख दुग्ध सप्लायर डेयरी दुकानदार को 9 माह का समय दिया जाए | तेरापंथ भवन मुलुंड में श्रीउत्सव एक कदम स्वालंबन का भव्य आयोजन | जैन साध्वियों का मजेरा में श्रद्धाभाव से हुआ भव्य मंगल प्रवेश | राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होगी पिपलान्त्री फिल्म | राजसमंद में ACB का बड़ा ट्रैप, सर्जन डॉ. पंकज जैन 1,800 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार | केलवाड़ा में राजपूत समाज की संयुक्त बैठक में सामाजिक निर्णय लिए | साध्वी श्री राकेश कुमारी आदि साध्वी वृंद का विलेपार्ले में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश | भाषण के एक हिस्से को चुनकर गलत मतलब निकाला गया', राजनाथ सिंह के वायरल वीडियो पर रक्षा मंत्रालय की सफाई |

अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 10% टैरिफ लागू किया है

2 घंटे पहले 1 बार देखा गौरी दवे

अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 10% टैरिफ लागू किया है,


मुम्बई डेस्क:अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 10% टैरिफ लागू किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका भारत के निर्यात पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। चीन समेत कई प्रतिस्पर्धी देशों पर अधिक टैरिफ लगने से भारतीय टेक्सटाइल और अन्य निर्यातकों को फायदा मिल सकता है।

अमेरिका ने धारा 301 (Section 301) के तहत भारतीय सामानों पर 10% का टैरिफ लागू कर दिया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस कदम का भारत के कुल निर्यात पर तात्कालिक असर बेहद सीमित रहेगा। पहले प्रस्तावित 12.5% की तुलना में यह फैसला भारत के लिए राहत भरा माना जा रहा है।टैरिफ दर को 12.5% से घटाकर 10% किया जाना एक सकारात्मक परिणाम है। यह दिखाता है कि भारत अमेरिकी प्रशासन के सामने अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में सफल रहा है। भारत उन देशों में शामिल है जिन पर अमेरिकी कार्रवाई के तहत सबसे कम टैरिफ लगाया गया है।भारतीय निर्यातकों पर बंधुआ मजदूरी (forced labour) के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह से निराधार बताया और कहा कि भारत के श्रम कानून बहुत सख्त हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव के जोखिम से बचने का सबसे अच्छा तरीका अपने निर्यात बाजार का दायरा बढ़ाना है।

टेक्सटाइल सेक्टर को फायदा
कम टैरिफ का सबसे ज्यादा फायदा कपड़ा (Textiles) जैसे श्रम-केंद्रित क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां भारत वैश्विक स्तर पर कड़ा मुकाबला करता है। एक्सपर्ट के अनुसार टेक्नोलॉजी में निवेश, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और नए बाजारों की तलाश ही भारतीय निर्यात को भविष्य के टैरिफ झटकों से सुरक्षित रखेगी।


अमेरिका के इस टैरिफ से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है। देश के शीर्ष निर्यातक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने कहा कि कई प्रतिस्पर्धी देशों पर भारत के समान या उससे भी अधिक टैरिफ लगाया गया है।

भारत के लिए यह अच्छी बात
अमेरिका ने भारत को 10% वाली निचली टैरिफ श्रेणी में रखा है, जबकि चीन, वियतनाम, थाईलैंड, यूएई, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई प्रतिस्पर्धी देशों पर 12.5% का उच्च टैरिफ लगाया गया है। जिन देशों पर 12.5% टैरिफ लगा है, वहां से अमेरिकी खरीदार भारत की ओर रुख कर सकते हैं। 2.5% का यह अंतर प्रतिस्पर्धी बाजारों में काफी मायने रखता है।
स्टील, एल्युमीनियम, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, फार्मा अवयव और कुछ कृषि उत्पाद, जो धारा 232 के तहत आते हैं, उन्हें इस अतिरिक्त टैरिफ से छूट मिलती रहेगी।

GTRI ने उठाए सवाल
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने 10 प्रतिशत का फोर्स्ड-लेबर (बंधुआ मजदूरी) टैरिफ लगाने के फैसले के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। GTRI का कहना है कि अमेरिकी सरकार का यह कदम किसी ठोस सबूत पर आधारित नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार बाधाओं को बनाए रखना है।

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