मुंबई में जयपुर की सांस्कृतिक झलक, और सामूहिक स्वाद से संवरा संबंधों का संसार
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धीरज दवे 
मुंबई: जयपुर प्रवासी संघ (जेपीएस) मुंबई द्वारा सावन माह के उपलक्ष्य में आयोजित 18वीं सामूहिक गोठ आयोजन आत्मीय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में जयपुर के प्रवासी परिवारों ने सपरिवार भाग लेकर वर्षों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्तों को नई ऊष्मा प्रदान की। जेपीएस के संस्थापक अध्यक्ष और मुख्य संरक्षक कृष्ण कुमार राठी एवं अध्यक्ष सुनील सिंघवी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे से आत्मीय मुलाकात कर पुराने संबंधों को ताज़ा किया तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।सावन की हरियाली और धार्मिक वातावरण के बीच बोरिवली स्थित त्रिमूर्ति जैन मंदिर, पोदनपुर परिसर में आयोजित इस गोठ में पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति की सजीव झलक दिखाई दी। जेपीएस की सचिव अनिता सुशील माहेश्वरी के अनुसार मुंबई में रह रहे जयपुर के परिवारों के बीच सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक आत्मीयता का यह सिलसिला लगातार मजबूत होता रहे। संस्था के कोषाध्यक्ष अनिल हीरावत सहित मधु राठी, अनिल अग्रवाल, राजकुमार बैद, गिरिश अग्रवाल, दीपेंद्र बैराठी, मनीष शाह, धरमचंद कोठारी, विजय सेठ, अनिल कर्णावत, मनीष लेखी, नरेंद्र हीरावत, विनोद दुग्गड़, कुसुम काबरा आदि सभी प्रमुख सदस्यों के सहयोग से पूरे आयोजन में अपनत्व, सौहार्द और पारिवारिक एकजुटता का वातावरण बना रहा। जेपीएस की इस सामूहिक गोठ का उद्देश्य केवल सामाजिक मिलन नहीं, बल्कि मुंबई में बसे जयपुर वासियों के बीच आत्मीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है। उन्होंने आयोजन की सफलता पर अपने संदेश में सभी सदस्यों और पदाधिकारियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में संघ के सभी संरक्षकों, पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी सुव्यवस्थित तैयारियों के कारण पूरा आयोजन गरिमापूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। गोठ का सबसे आकर्षक केंद्र पारंपरिक राजस्थानी भोजन रहा। जयपुर से विशेष रूप से आए अनुभवी कारीगरों ने प्रसिद्ध उड़द की दाल, बाटी और चूरमा सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए, जिनका उपस्थित परिवारों ने भरपूर आनंद लिया। भोजन के असली जयपुरी स्वाद ने सभी को अपने शहर और बचपन की यादों से जोड़ दिया तथा प्रवासी परिवारों के लिए यह अनुभव विशेष रूप से भावुक और यादगार बन गया।