SIR पर सर्वसम्मति से लिए फैसले, फॉर्म-6 में कोई चेंज नहीं; चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
SIR पर सर्वसम्मति से लिए फैसले, फॉर्म-6 में कोई चेंज नहीं; चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के कामकाज के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने कहा कि याचिका पूरी तरह एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। हलफनामे को CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। आयोग के मुताबिक, जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीनों आदेश भी सर्वसम्मति से लिए गए फैसले थे।
ECI ने CEC को काम करने से रोकने की मांग वाली याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाया है। आयोग का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के समान है। दशहरा की छुट्टियों के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और विस्तृत, बिंदुवार हलफनामा देने की अनुमति मांगी है। ECI के हलफनामे की 15 अहम बातें
1. याचिका समाचार रिपोर्ट पर आधारित: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CEC के कामकाज के खिलाफ दायर याचिका पूरी तरह एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।
2. तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति: आयोग के मुताबिक, जवाबी हलफनामे को CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
3. SIR के तीनों आदेश सर्वसम्मति से पारित: ECI ने कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी SIR से जुड़े तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे।
4. फाइलों पर टिप्पणियां अंतिम निर्णय नहीं: आयोग के अनुसार, फाइल पर काम के दौरान CEC या चुनाव आयुक्तों की ओर से की गई टिप्पणियां, सवाल और सुझाव आयोग के अंतिम फैसले नहीं माने जा सकते।
5. फाइल मंजूरी की प्रक्रिया: ECI ने बताया कि फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और अंत में CEC के पास जाती है। जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज किया जाता है।
6. अधिकारों से बाहर आदेश पर कार्रवाई: आयोग ने कहा कि यदि कोई अधिकारी अपनी निर्धारित शक्तियों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
7. 28 जुलाई के आदेश पर सफाई: आयोग के मुताबिक, कार्य आवंटन से जुड़ा 28 जुलाई का आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। अगले दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।
8. 30 जुलाई को आदेश लागू नहीं करने का निर्देश: ECI ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद 28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश को लागू नहीं किया गया।
9. फॉर्म-6 में संशोधन नहीं हुआ: आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उसके मुताबिक, इसमें संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। SIR का घोषणा-पत्र इससे अलग दस्तावेज है।
10. ऑनलाइन आवेदन में होगा अलग-अलग डिस्प्ले: आयोग ने माना कि ऑनलाइन डिस्प्ले देखकर फॉर्म-6 में संशोधन होने का भ्रम हो सकता है। ECI के अनुसार, 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन को फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र में अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की जाएगी, जैसा कागजी फॉर्म में होता है।
11. सूची में नाम नहीं होने पर घर जाकर लिए जाएंगे दस्तावेज: आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में मैप नहीं हो पाए मतदाताओं को सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं है। बूथ-स्तरीय अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं। सुनवाई केवल विशेष मामलों में होगी और प्राथमिकता ऑनलाइन सुनवाई को दी जाएगी।
12. ECINet पर ERO के आदेश के बिना नाम नहीं जुड़ेगा या हटेगा: ECI ने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम न जोड़ा जा सकता है और न हटाया जा सकता है। नियमों के पालन की जांच के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है।
13. गोवा में 97 मतदाताओं का मामला: आयोग के मुताबिक, सूची से छूटे 97 मतदाताओं में से 88 पहले ही पंजीकृत हो चुके थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।
14. पश्चिम बंगाल की अपीलों पर आयोग की सफाई: ECI ने कहा कि मतदाताओं को सूची में शामिल करने के खिलाफ अपीलें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अधिकारियों ने दायर की थीं। आयोग के मुताबिक, ये मामले उसके सामने नहीं लाए गए थे।
15. आंतरिक फाइलें, EVM और आगे के जवाब पर पक्ष: आयोग ने कहा कि उसने कोई आंतरिक नोट या फाइल मीडिया को जारी नहीं की और न ही ऐसा करने की अनुमति दी। EVM पर बार-बार उठाए गए सवालों को भी उसने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका बताया। दशहरा की छुट्टियों का हवाला देते हुए ECI ने विस्तृत, बिंदुवार जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी है।